प्रधानमंत्री की मौजूदगी में आधार कार्ड पर संसद में जबरदस्त हो – हल्ला

नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस सांसदों ने ‘आधार कार्ड’ के मुद्दें को संसद के दोनों सदनों में गुरुवार को जोर – शोर से उठाया। इस मुद्दे पर हंगामे की वजह से राज्य सभा में सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी। सपा, बीजद, जनता दल (यू) और दूसरे दलों ने भी आधार के जरिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तानांतरण के सरकारी फैसले का विरोध किया और इसे स्थगित करने की मांग की। जब आधार को लेकर राज्य सभा में हंगामा हो रहा था और सदन की कार्यवाही पहले दो बार स्थगित हुई तो सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे। राज्य सभा में सुबह आवश्यक दस्तावेज के सदन के पटल पर रखते ही तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बीजद के सांसद खड़े हो गए और उन्होंने ‘आधार’ के मुद्दे पर उनकी तरफ से दिए नोटिस पर उप सभापति का ध्यान दिलाया। समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने आधार को विभिन्न सुविधाओं के लिए अनिवार्य बनाने के केन्द्र के आदेश को ‘तुगलकी फरमान’ बताते हुए कहा कि राज्य सरकारों को इस मामले में तीन बार निर्देश भेजे जा चुके हैं। आधार को अनिवार्य बनाए जाने की वजह से लोगों को राशन कार्ड, गैस कनेक्शन, पेंशन जैसी सुविधाओं से नाम काट दिए जा रहे हैं उन्होंने कहा देश में अभी भी 40 फीसदी लोगों के आधार कार्ड नहीं बन पाए हैं। ऐसे में इस अनिवार्यता को तुरंत खत्म कर जब तक सबके आधार कार्ड नहीं बन जाते तब तक बीपीएल कार्ड पर ही सुविधाओं को जारी रखना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि यह मामला केवल पश्चिम बंगाल का नहीं है। उत्तर प्रदेश, ओडिशा जैसे कई राज्यों में इससे गरीबों को नुकसान पहुंच रहा है। डेरेक ने कहा केन्द्र सरकार ‘को आॅपरेटिव संघीय ढांचे’ की बात करती है। पर इस सिद्धांत पर अमल नहीं करती। उन्होंने कहा कि लोगों को पेंशन नहीं मिल रही है, छात्रवृति नहीं मिल रही है और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री बयान दे रहे हैं कि जिनके पास आधार नहीं उनको मिलने वाले केन्द्रीय लाभ बंद किए जाएंगे। इस मुद्दे को अत्यंत गंभीर बताते हुए उन्होंने उपसभापति से मांग की कि सारे नियमों को छोड़कर इस मुद्दे पर सदन में तुरंत चर्चा करानी चाहिए। तृणमूल कांग्र्रेस की इस मांग का समर्थन जनता दल-यू के शरद यादव, बीजद के दिलीप कुमार तिर्की और दूसरे पार्टी के सांसदों ने भी किया। हंगामे और शोरशराबे के बीच केन्द्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने सदस्यों को संतुष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की कोशिश है कि सभी के आधार कार्ड जल्द से जल्द बन जाएं। पर राज्य सरकारों से इसमें पूरा सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जो कमियां यहां सदस्य उठा रहे हैं और मांग कर रहे हैं उनपर केन्द्र सरकार गौर करेगी। वैंकेया के इस जवाब से सदस्य संतुष्ट नहीं हुए। तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर राय ने कहा कि सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड को अनिवार्य नहीं बनाया जाए। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड के लिए जिस संसदीय एक्ट की बात केन्द्रीय मंत्री कर रहे हैं उसकी धारा 7 में दिया गया है कि विभिन्न कारणों से यदि किसी का आधार कार्ड नहीं बन पाता तो उसे छूट मिलनी चाहिए। सुखेंदु राय ने कहा कि गैर जानकारी या गरीबी के अभाव में कोई यदि कार्ड नहीं बनवा पाता तो उसे छूट नहीं मिलनी चाहिए। इसके बाद सरकार की तरफ से बार-बार यह कहा गया कि उनकी तरफ से आश्वासन दिया गया है पर तृणमूल कांग्रेस और सपा, बीजद के सांसद आधार पर केन्द्रीय आदेश तत्काल वापस लेने की मांग करते रहे। वे नारेबाजी करते हुए आसन के समीप पहुंच गए। उपसभापति कुरियन ने हंगामा शांत होते न देख दोपहर साढ़े बारह बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी। पर इसके बाद भी कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। पांच मिनट बाद कार्यवाही स्थगित कर दी। इसके बाद भी इसी मुद्दे पर एक बार और कार्यवाही स्थगित हुई। उधर लोकसभा में भी शून्यकाल में तृणमूल कांग्रेस ने आधार का मुद्दा उठाया और सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की। पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि एलपीजी गैस, सरकारी छात्रवृत्ति, पीएफ, खाद्य सुरक्षा जैसी आर्थिक सुविधाओं और सरकारी लाभ के लिए आधार को अनिवार्य बना दिया गया है। पर केवल बंगाल में एक करोड़ लोगों को अभी तक आधार कार्ड नहीं मिल पाया है। इस वजह से कई गरीब लोग सरकारी लाभ से वंचित हो रहे हैं। इसलिए तृणमूल कांग्रेस की मांग है कि आधार कार्ड को अनिवार्य न रख इसे वैकल्पिक सुविधा के नाम पर रखा जाए। उन्होेंने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। कल्याण बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री और दूसरे केन्द्रीय मंत्रियों से मिलकर यह मुद्दा उठाया है। बिहार, ओडीसा, उत्तर प्रदेश की तरफ से भी केन्द्र सरकार के सामने यह मुद्दा कई बार उठाया जा चुका है। गौरतलब है कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल कर अन्य मुद्दों के अलावा आधार की शर्त की वजह से गरीबों को हो रही दिक्कतों का ब्याेरा दिया था। उन्होंने केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के सामने भी बंगाल की अन्य आर्थिक समस्याओं के साथ इसे रखा था। इसके पहले जब ममता बनर्जी अंतरराज्यीय बैठक के लिए दिल्ली आई थीं तो बैठक में भी उन्होंने आधार के अभाव और बैंक, डाकघर की सुविधाएं हर जगह न होने की वजह से लोगों की परेशानियों के बारे में बताया था। वित्त मंत्री से मिलने के बाद कल ममता बनर्जी से पार्टी सांसदों के साथ हुई बैठक में यह तय किया गया था कि ‘आधार’ के मुद्दे को तृणमूल दोनों सदनों में उठाएगी।

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